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Breaking कमला पार्क रेत घाट के पास छुरीबाज़ी की घटना 17 साल के युवक को बदमाशों ने मारी छुरी, घायल का इलाज हमीदिया अस्पताल में जारी।

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*भोपाल के नए पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने संभाली कमान पुलिस कमिश्नर हरि नारायणचारी ने पुष्पगुच्छ देकर किया स्वागत*

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भोपाल ब्रेकिंग केंद्रीय बजट पर मंत्री विश्वास कैलाश सारंग की प्रतिक्रिया।

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विदिशा में एक गर्भवती महिला को कथित तौर पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण प्रसव बीच सड़क पर करना पड़ा।

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कौशलेंद्र विक्रम सिंह भोपाल कलेक्टर।

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सोना एक दिन में ₹11,486 बढ़कर ₹1.76 लाख पहुंचा: चांदी तीन दिन में ₹68,228 महंगी, ₹3.86 लाख हुई,

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सवाल उठता है कि जब डंपर खराब था तो अब तक सड़क से हटाया क्यों नहीं गया।

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मध्‍यप्रदेश के सागर ज‍िले के शासकीय शाला परिसर हनौता में तिरंगे का अपमान, हंसिए से काटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

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ब्रेकिंग न्यूज भोपाल के ईदगाह हिल्स चौकी पर सैकड़ों लोगों का घेराव।

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कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कलेक्ट्रेट में फहराया तिरंगा।

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सूखी सेवनिया पुलिस की तत्परता से बची महिला की जान।

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धार भोजशाला में पूजा और नमाज शांतिपूर्वक निपटने के बाद शनिवार को सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे खाकीधारियों ने इस तरह नाच-गाकर मनाया जश्न।

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मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव का बड़ा बयान महापोर मालती राय के हाथ गाय के खून से रंगे हुए हैं।

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थाना निशातपुरा थाने से 100 मीटर की दूरी पर अपहरण ऑटो से गाड़ी टकराने के बाद युवक का अपहरण।

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सांसद आलोक शर्मा ने मेट्रो को लेकर जताई आपत्ति।

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भोपाल के वीआईपी रोड पर एक ही बाइक पर सात युवक सवार।

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जिलाबदर अपराधी बना 'फेसबुक "समाजसेवक" दुुस्साहस: अब क्राइम ब्रांच के एक पुलिस अधिकारी को किया टारगेट।

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जनता की शिकायत पर मंत्री श्री विश्वास सारंग का सख्त एक्शनऔचक निरीक्षण में अनुपस्थित मिलने पर वार्ड प्रभारी निलंबित।

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महापौर मालती राय खुद लिप्त हे गोमांस मामले में :बजरंग दल आज बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महापौर का इस्तीफा मांगा।

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Post By : DPR24
Author : PPR 24 Views 130
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जब सत्ता के हाथों ने हया की सरहद लांघी।

जब सत्ता के हाथों ने हया की सरहद लांघी।

*पटना | जब सत्ता के हाथों ने हया की सरहद लांघी*

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला डॉक्टर को नियुक्ति-पत्र देते वक्त जो शर्मनाक हरकत की गई, वह सिर्फ़ बदतमीज़ी नहीं बल्कि क़ानून, संविधान और इंसानियत—तीनों की खुली तौहीन है। भरे मंच से एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति एक महिला से यह सवाल करता है— “यह क्या है?”— और फिर उसके हिजाब को हाथ लगाकर सरकाता है। यह मंजर सिर्फ़ देखने लायक नहीं था, बल्कि शर्म से आँखें झुका लेने वाला था।

जिस नक़ाब और हिजाब को एक औरत अपनी इज़्ज़त, आस्था और निजता की हिफ़ाज़त के लिए ओढ़ती है, उसे सार्वजनिक मंच पर छूना और हटाने की कोशिश करना महिला की मर्ज़ी पर हमला है। यह हरकत इस बात का सुबूत है कि सत्ता का नशा जब सर चढ़ता है, तो इंसान अपनी मर्यादा भी भूल जाता है।

यह कोई मामूली या “मासूम हरकत” नहीं थी।
अगर यही काम कोई आम आदमी करता, तो उस पर *भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएँ तुरंत लागू होतीं- धारा 74 – महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला- धारा 75 – यौन उत्पीड़न- धारा 76 – बिना सहमति शारीरिक स्पर्श- धारा 79 – महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला आचरण- और संविधान का अनुच्छेद 21 – व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन- अनुच्छेद 25 – धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला*

क़ानून न मुख्यमंत्री को पहचानता है, न गद्दी को — हरकत, हरकत होती है, और उसके लिए जवाबदेही सब पर बराबर है।

जिस नीतीश कुमार को कभी “सुशासन बाबू” कहा जाता था, आज वही एक मुस्लिम महिला के पर्दे पर हाथ डालते नज़र आए। सवाल यह है कि क्या सत्ता की संगत ने सुशासन की रूह को भी निगल लिया?
बीजेपी “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देती है, लेकिन उसी पार्टी के नेताओं और उनके आसपास के चेहरों से जुड़ी बेटियों की इज़्ज़त रौंदने वाली तस्वीरें और वीडियो देश देख चुका है। क्या वही कथनी-करनी का ज़हर अब बिहार के मुख्यमंत्री के लहजे और हरकत में भी उतर आया है?

यह सिर्फ़ एक मुस्लिम महिला का नहीं, बल्कि पूरी औरत जात का अपमान है। यह संविधान की आत्मा पर तमाचा है। उम्र या ओहदा किसी को औरत की इज़्ज़त से खेलने का लाइसेंस नहीं देता—बल्कि ऊँचा पद ज़्यादा ज़िम्मेदारी माँगता है।

इससे भी ज़्यादा अफ़सोसनाक वह लोग हैं जो मंच पर खड़े होकर हँसते रहे। यह हँसी नहीं थी—यह सहमति की ख़ामोशी थी।
ऐसे नेतृत्व पर लानत है, और उनसे भी ज़्यादा उन पर जो ऐसे कृत्य पर चुप रहकर ज़ालिम का साथ देते हैं।

यह मामला छोटा नहीं है। यह औरत, संविधान और इंसाफ़—तीनों की परीक्षा है।
अब सवाल यह नहीं कि “नियत क्या थी”, सवाल यह है कि—
क्या क़ानून सबके लिए बराबर है, या सत्ता वालों के लिए अलग?
देश देख रहा है।
*और याद रखिए—इतिहास हरकत भी लिखता है, और ख़ामोशी भी।*
 

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